Uttarakhand

मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू झांसी से गिरफ्तार… 44 आपराधिक मामले, गिरफ्तारी के बाद फॉरेंसिक जांच तेज

उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े विवादित मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा गिरधारी लाल साहू आखिरकार उत्तराखंड पुलिस की एसआईटी के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश के झांसी से गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि वह पिछले कई दिनों से अपने एक रिश्तेदार के घर पर छिपा हुआ था। पुलिस की कार्रवाई के दौरान उसके भतीजे सतेंद्र राठौर को भी बरेली के जोगी नवादा इलाके से गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार, गिरधारी लाल साहू गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अलग-अलग जगहों पर शरण ले रहा था। बस्ती, प्रयागराज और नेपाल में ठिकाने बदलने के बाद वह दिल्ली पहुंचा और वहां से झांसी चला गया। एसआईटी को उसके झांसी में छिपे होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद टीम ने बृहस्पतिवार रात से ही शहर में डेरा डाल दिया और उसके संभावित ठिकानों पर निगरानी शुरू कर दी।

मुखबिर तंत्र से मिली जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से पुलिस को आखिरकार उसके रिश्तेदार के घर का पता चल गया। इसके बाद एसआईटी ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे पूछताछ के लिए अज्ञात स्थान पर ले गई, जहां उससे फरारी के दौरान संपर्क में रहे लोगों और उसके छिपने के ठिकानों के संबंध में जानकारी जुटाई गई।

मंत्री ने पति के खिलाफ दर्ज कराई थी प्राथमिकी

गौरतलब है कि कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि चार कंपनियों में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर रेखा आर्या को निदेशक पद से हटाया गया। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही गिरधारी फरार चल रहा था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर नौ सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया था। टीम को आरोपी की तलाश के साथ-साथ मामले से जुड़े दस्तावेजों, ऑडियो क्लिप और अन्य साक्ष्यों की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी।

बीहड़ों में छिपने की भी थी योजना

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, गिरधारी लाल साहू पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए नेपाल के अलावा चंबल के बीहड़ों में भी छिपने की योजना बना रहा था। बताया जा रहा है कि इसके लिए उसने कथित तौर पर कुछ आपराधिक नेटवर्क से संपर्क साधने की कोशिश की थी। हालांकि, वह झांसी से चंबल के बीहड़ों तक पहुंच पाता, उससे पहले ही एसआईटी ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

44 आपराधिक मुकदमों की जानकारी आई सामने

एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल के मुताबिक, जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली है कि गिरधारी लाल साहू के खिलाफ उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा और गैंगस्टर एक्ट समेत कुल 44 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

एसआईटी ने इस प्रकरण में ऑडियो क्लिप कब्जे में लेने के साथ ही गवाहों के बयान दर्ज किए और कंपनी से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। जांच में गिरधारी के भतीजे सतेंद्र राठौर की भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद उसका नाम भी प्राथमिकी में शामिल किया गया। पुलिस ने उसे बरेली से गिरफ्तार किया है।

चार कंपनियों के दस्तावेजों की जांच

एसआईटी ने जिन चार कंपनियों के दस्तावेजों की जांच की, उनमें देवों के देव महादेव, बनखंडी रुद्राक्ष धाम, श्री अंबे ऑटो डीलर्स प्राइवेट लिमिटेड और श्री बनखंडी धाम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

पुलिस इन कंपनियों के स्वामित्व, निदेशक पद में हुए बदलाव और उनसे संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। साथ ही कंपनियों की वास्तविक बाजार कीमत का भी आकलन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इन कंपनियों की कुल संपत्ति कई करोड़ रुपये की हो सकती है।

अब वायरल ऑडियो की होगी फॉरेंसिक जांच

गिरधारी और उसके भतीजे की गिरफ्तारी के बाद अब मामले में वायरल ऑडियो की फॉरेंसिक जांच का रास्ता भी साफ हो सकता है। दरअसल, रेखा आर्या की ओर से एक वीडियो और ऑडियो सामने रखे जाने के बाद गिरधारी ने इसे फर्जी बताते हुए दावा किया था कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है।

अब गिरफ्तारी के बाद पुलिस गिरधारी की आवाज का नमूना लेकर वायरल ऑडियो से उसका मिलान कराने के लिए फॉरेंसिक लैब भेज सकती है। वहीं, कथित कूटरचित हस्ताक्षरों के मामले में भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है। एसएसपी के अनुसार, संबंधित हस्ताक्षरों को लेकर जांच में गिरधारी की भूमिका सामने आई है।

गिरधारी की गिरफ्तारी के बाद अब इस पूरे प्रकरण में कई अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। एसआईटी की पूछताछ और फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कंपनियों के दस्तावेजों में कथित हेरफेर कैसे हुआ और वायरल ऑडियो की वास्तविकता क्या है।

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