Uttarakhand

देहरादून: सरकारी गवाह बनाने का झांसा, वीडियो कॉल पर डराया और खाते से निकलवाए 30 लाख

साइबर अपराधियों ने सरकारी एजेंसियों के नाम का सहारा लेकर एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को ठगी का शिकार बना लिया। आरोपियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी। गिरफ्तारी का डर दिखाकर बैंक खातों में जमा रकम की जांच कराने के बहाने उनसे 30 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। ठगी को असली दिखाने के लिए आरोपियों ने बाद में उनके मोबाइल पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का फर्जी गिरफ्तारी वारंट भी भेज दिया।

मोबाइल नंबर से अपराध होने का दिया हवाला

पीड़ित की शिकायत के अनुसार, चार अक्तूबर को उनके मोबाइल पर एक कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जुड़ा बताते हुए कहा कि उनके नंबर से अवैध विज्ञापन और संदेश भेजे जा रहे हैं। इसके बाद संदीप राणा नाम के व्यक्ति ने संपर्क किया और खुद को सीबीआई अधिकारी बताया।

आरोपी ने दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड का इस्तेमाल मुंबई में सिम कार्ड खरीदने और बैंक खाता खोलने के लिए किया गया है। उसने आरोप लगाया कि इस खाते के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसे अपराध किए गए हैं। इसके बाद गिरफ्तारी की धमकी देकर पीड़ित पर दबाव बनाया गया।

सरकारी गवाह बनाने का दिया भरोसा

ठगों ने पीड़ित को कार्रवाई से बचने के लिए सरकारी गवाह बनने का विकल्प भी दिया। इसके लिए गोपनीय समझौते की बात कही गई। आरोपियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से कथित सीबीआई निदेशक से भी बात कराई, ताकि पीड़ित को उनकी पहचान और जांच की प्रक्रिया पर भरोसा हो जाए।

इसके बाद राहुल नाम के एक अन्य व्यक्ति ने खुद को सीबीआई से जुड़ा अधिकारी बताया। उसने कहा कि पीड़ित के बैंक खातों में जमा रकम की जांच आरबीआई की निगरानी में की जाएगी। आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि जांच के लिए एक खाते में भेजी गई रकम एक-दो घंटे के भीतर वापस कर दी जाएगी।

आरटीजीएस से दूसरे खाते में भेजे 30 लाख

लगातार मिल रही धमकियों और गिरफ्तारी के डर से पीड़ित आरोपियों के झांसे में आ गए। उन्होंने सात अक्तूबर को आरटीजीएस के माध्यम से अपने बैंक खाते से 30 लाख रुपये एसबीआई के मदुरै स्थित खाते में ट्रांसफर कर दिए।

रकम मिलने के बाद भी आरोपियों का दबाव खत्म नहीं हुआ। उन्होंने पीड़ित पर दूसरे खाते में बची रकम जमा कराने के लिए भी जोर दिया। नौ अक्तूबर को उनके मोबाइल पर ईडी का कथित फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजा गया। इसके बाद उन्हें ठगी का संदेह हुआ और उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

साइबर थाना प्रभारी देवेंद्र नबियाल के अनुसार, शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सावधान रहें: कोई भी असली सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर डराकर पैसे ट्रांसफर करने या तथाकथित डिजिटल अरेस्ट के जरिए रकम की जांच करने के नाम पर भुगतान नहीं मांगती। ऐसे मामलों में तुरंत अपने बैंक और साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।

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